छत्तीसगढ़ में सूबा शासन | Suba shasan in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के इतिहास में इस प्रथा को जन्म देने का प्रमुख कारण मराठा शासकों का नागपुर में रहकर छत्तीसगढ़ में सूबा शासन व्यवस्था Suba shasan in Chhattisgarh को संचालित करना था सूबेदार शासक नहीं होते थे अपितु मराठों के अधीन अधिकारी मात्र होते थे

अवधि – 1788 से 1818

मुख्यालय – रतनपुर

सूत्रधार – व्यंकोजी भोसले

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Suba shasan in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में सूबा शासन व्यवस्था Suba shasan in Chhattisgarh

महीपत राव दिनकर

छत्तीसगढ़ के प्रथम सूबेदार
17 मई 1790 ईस्वी में यूरोपियन यात्री फॉरेस्टर का रायपुर में आगमन हुआ
इनका आनंदीबाई से सत्ता के लिए संघर्ष हुआ
इन्होंने रायपुर के बूढ़ा तालाब का निर्माण करवाया


विट्ठलराव दिनकर

1790 से 1796 ईस्वी
विदेशी यात्री मिस्टर ब्लंट ने इस समय छत्तीसगढ़ की यात्रा की इन्हें इन्होंने परगना पद्धति लागू की
परगना प्रमुख – कमाविसदार
इन्होंने कल्चुरी कालीन छत्तीसगढ़ को 27 परगनों में विभाजित किया


भवानी कालू


केशव गोविंद

1797 से 1808
सर्वाधिक समय तक सूबेदार
इनके शासनकाल में यूरोपीय यात्री कोलब्रुक ने छत्तीसगढ़ की यात्रा की
इन्होंने पिंडारी आक्रमणों से रक्षा की
पिंडारियों का प्रथम आक्रमण इन्हीं के शासनकाल में हुआ


बिकोजी पिंडरी


बीकाजी गोपाल भीकाभाऊ

सरगुजा रियासत जमीदारी में उत्तराधिकार का संघर्ष


सखाराम हरि


यादवराव दिवाकर

छत्तीसगढ़ के अंतिम सूबेदार
1818 तक छत्तीसगढ़ में पिंडारी ओ का अंत हो गया


छत्तीसगढ़ के इतिहास ( Chhattisgarh ka itihas ) में ब्रिटिश रेजिडेंट जेनकिंस ने सूबा पद्धति को समाप्त कर ब्रिटिश अधीक्षकों की नियुक्ति की

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जानिए किन-किन मराठा शासकों ने किया छत्तीसगढ़ में शासन | History of Chhattisgarh

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